रीवा जिले के सिरमौर अस्पताल में अमानवीय लापरवाही सामने आई, जहां एक वृद्ध तीन घंटे तक पोर्च में तड़पता रहा। डॉक्टरों की अनदेखी से उसकी मौत हो गई, परिजन करते रहे मदद की गुहार।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में यूपीएस बैटरियां एक्सपायर होने से वेंटिलेटर बैकअप खतरे में है। प्रबंधन की लापरवाही से गंभीर वार्डों में मरीजों की जान जोखिम में है और बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
सतना के निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान लापरवाही से युवक की मौत का आरोप लगा है। गलत जगह कट लगाने से हालत बिगड़ी, परिजनों ने प्रदर्शन कर डॉक्टरों और प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की।
रीवा के गांधी स्मृति चिकित्सालय में गायनी ओटी में ऑपरेशन के दौरान आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। अधूरे ऑपरेशन में महिला को तो बचा लिया गया, लेकिन नवजात को ओटी में ही छोड़ दिया गया, जिससे वह आग में जल गया। एक्सपायरी फायर उपकरण और शॉर्ट सर्किट ने अस्पताल की गंभीर लापरवाही उजागर की है।
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौंकाने वाली घटना; मॉर्चुरी के पास कचरे के ढेर से दो अधजले नवजात बच्चों के शव बरामद। पुलिस ने अवैध संबंध और अस्पताल की लापरवाही सहित सभी पहलुओं पर जाँच शुरू की।
इंदौर के एमवाय अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की मौत ने हड़कंप मचा दिया है। दोनों बच्चों को चूहों ने काटा था। अस्पताल प्रशासन ने इन मौतों का कारण चूहों को काटने को नहीं बताया है, बल्कि उनकी गंभीर हालत को जिम्मेदार ठहराया है। यह लेख इस पूरी घटना, आरोपों और सरकार की प्रतिक्रिया पर विस्तार से जानकारी देता है।
रीवा जिले के मऊगंज अस्पताल में एक 16 वर्षीय छात्रा को समय पर इलाज नहीं मिला, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। सिस्टम की लापरवाही यहीं नहीं रुकी—पोस्टमार्टम में देरी, शव वाहन के लिए पैसे की मांग और लोडिंग वाहन में शव की विदाई ने मानवता को शर्मसार कर दिया। यह घटना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनहीन तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।
सेमरिया क्षेत्र में पशु चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पशु अस्पताल में न डॉक्टर आते हैं, न इलाज होता है। बरसात में बढ़ी बीमारियों से पशुपालक परेशान हैं। अस्पताल की गंदगी, अफसरों की लापरवाही और डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने ग्रामीणों की उम्मीदें तोड़ दी हैं।
रीवा में डॉग बाइट का शिकार हुए 14 वर्षीय किशोर की मौत रैबीज संक्रमण से हो गई, जबकि उसे तीन डोज रैबीज वैक्सीन लग चुकी थी। परिजनों ने इंजेक्शन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। कलेक्टर ने मामले की जांच कर अस्पताल से रिपोर्ट मांगी है।
सतना जिला अस्पताल की संवेदनहीनता एक बार फिर उजागर हुई है। सीएमएचओ के आदेश के बावजूद नए स्ट्रेचर में दवाइयां ढोई जा रही हैं और मरीजों को जर्जर, कबाड़ स्ट्रेचर मिल रहे हैं। यह लापरवाही मरीजों की जान जोखिम में डाल रही है। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी और सिस्टम की खामियां एक बार फिर चर्चा में हैं। पूरा सच जानिए इस रिपोर्ट में।






















